प्रयागराज महाकुंभ में हुए हादसे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना बयान जारी किया है, जिसमें बताया गया कि भगदड़ के कारण 30 लोगों की मौत हो गई है। प्रशासन ने ये भी स्पष्ट किया है कि भगदड़ कैसे मची।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 घंटे बाद इस हादसे की पुष्टि की और बताया कि 30 श्रद्धालुओं की जान चली गई। डीआईजी वैभव कृष्ण और मेला क्षेत्र के डीएम विजय किरण आनंद ने 29 जनवरी की शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस घटना की जानकारी दी। डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि महाकुंभ में भगदड़ मचने से 30 श्रद्धालु मारे गए हैं, जिनमें से 25 की पहचान हो चुकी है। इसके अलावा, करीब 60 लोग घायल हुए हैं। घायलों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि ये भगदड़ कैसे हुई?
भगदड़ कैसे मची?
भगदड़ बैरिकेडिंग टूटने की वजह से मची। बुधवार, 29 जनवरी को मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान था। रात एक से दो बजे के बीच, ब्रह्म मुहूर्त से पहले अखाड़ा मार्ग पर भारी भीड़ जमा हो गई। इस भीड़ के दबाव में दूसरी तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग दूसरी तरफ ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाने के इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं पर चढ़ गए। इस दौरान कई लोग कुचल गए। करीब 90 लोगों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया, लेकिन दुख की बात है कि इनमें से 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इनमें से 25 की पहचान हो चुकी है और बाकी की पहचान की प्रक्रिया जारी है। इनमें कर्नाटक के 4, असम के 1, गुजरात के 1 लोग शामिल हैं। इस हादसे में 36 लोगों का इलाज स्थानीय मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। फिलहाल, स्थिति सामान्य है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया निर्णय
सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, सभी महामंडलेश्वरों, संतों और अखाड़ों से अनुरोध किया है कि वे कुछ देर बाद पवित्र स्नान करें। इसके बाद अखाड़ों का अमृत स्नान सकुशल संपन्न हो गया।
डीआईजी वैभव कृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि जहां भगदड़ मची थी, वहां किसी वीआईपी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने ये भी बताया कि महाकुंभ में आगे होने वाले बड़े पर्वों या स्नान के दौरान कोई वीवीआईपी मूवमेंट नहीं होगा।
महाकुंभ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
महाकुंभ में भगदड़ मचने के बाद, 29 जनवरी को प्रशासन ने कई बड़े फैसले लिए। प्रयागराज में 8 प्रमुख बॉर्डर-पॉइंट्स जैसे भदोही, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, मिजापुर को बंद कर दिया गया है। पूरे मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है, जिससे अब मेले में कोई भी गाड़ी नहीं चलेगी। इसके अलावा, रास्ते को वन-वे कर दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को एक रास्ते से लाया जा सके और स्नान के बाद दूसरे रास्ते से वापस भेजा जा सके। यह व्यवस्था 4 फरवरी तक लागू रहेगी।
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